Difference between Small Towns and Big Cities

Difference between Small Towns and Big Cities

दोस्तों, मैं राजस्थान के भरतपुर नाम क छोटे से जिले से हूँ. मैंने यहाँ के लोगो को बचपन से देखा है…भरतपुर का नाम कई वजहों से प्रसिद्ध है…इसके कुछ कारण हैं – यहाँ का लोहागढ़ का क़िला अपनी अजेय छवि के लिए प्रसिद्ध है, जो कभी भी अंग्रेज़ो का ग़ुलाम नहीं बना…यहाँ के लोग बहुत ही मज़ाकिया अंदाज़ वाले हैं, जो अपने जीवट स्वभाव के लिए जाने जाते हैं…भरतपुर राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार कहलाता है…यहाँ का केवलादेव अभयारण्य विश्व प्रसिद्ध है….
बहरहाल, ये article भरतपुर की बढ़ाई करने के लिए नहीं, और ना ही ये यहाँ के किस्से सुनाने के लिए है…चूंकि मैं यहाँ से हूँ, तो मैं छोटे कस्बेनुमा जगहों के लोग कैसे होते हैं, ये आसानी से बता सकता हूँ,
यहाँ पर मैंने देखा है के यदि किसी के घर में कोई समस्या है तो बाकी सभी लोग उनकी मदद को आगे आ जाते हैं…यदि कोई बीमार हो तो उसकी देखभाल करने वालो की कोई कमी नहीं होती…कोई यदि अपने बूढ़े माँ बाप को दुखी करता है, तो बाकी लोग उनकी देखभाल करते हैं…
किन्तु, हाल ही की एक घटना ने मुझे बड़ा विचलित सा किया है…मेरे एक मित्र जो कि किसी कारणवश जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल मैं आये थे, उन्होंने मुझे बताया कि किस प्रकार कोई कलयुगी संतान अपने बूढ़े बाप को अस्पताल के एक कोने में मरने के लिए छोड़ गयी है…और अस्पताल वालो ने बताया कि कई दिनों से वो आदमीं वही भूखा प्यासा पड़ा कराह रहा था, और उसके पूरे शरीर में सूजन आ गयी थी …मेरे मित्र ने किसी प्रकार उस बूढ़े व्यक्ति के लिए खाना खाने का इंतज़ाम किया और उन्हें वहाँ से निकाल कर एक दूसरी जगह shift किया ….फिर वो दुखी मन से वापस घर लौट गया, क्योंकि पराये शहर में ख़राब तबियत के साथ वो इससे अधिक शायद कर भी नहीं सकता था…

लेकिन मित्रो इससे सोचने लायक कई बातें निकलती हैं…उनमे से सबसे प्रमुख है कि क्या हमारे संस्कार और आदर्श बिलकुल मर चुके हैं…और क्या ये बढ़ता हुआ शहरीकरण एक दिन हमारी हज़ारो साल पुरानी सभ्यता को समाप्त ही कर के मानेगा…इस घटना से कम से कम एक बात तो सिद्ध हो ही जाती है के छोटे शहरो और गावों में अभी भी मानवता ज़िंदा है…लेकिन अगर हम लो ऐसे ही अंधी तरक्की करते गए तो न जाने छोटी जगहों पे भी ये कब तक ज़िंदा रह पायेगी….

इस बारे में आप लोग भी अपने विचार अवश्य प्रकट करें (नीचे कंमेंट बॉक्स में)…देखते हैं के मेरी तरह सोचने वाले और कितने लोग हैं…

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